New Delhi. देश में बैंक घोटालों और बैंकों को चूना लगाकर विदेश भागने वालों की संपत्तियां जब्त कर ली जाएंगी। इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार एक अध्यादेश ला रही है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस अध्यादेश को मंजूरी मिल गई है।
आर्थिक अपराध पर लगाम के लिए बनेगा विशेष मंच
केंद्र की मोदी सरकार ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अध्यादेश-2018 लाने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि अध्यादेश का मकसद आर्थिक अपराधियों पर भारतीय न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहकर भारतीय कानून की प्रक्रिया से बचने के मामले में लगाम कसना है। अध्यादेश के तहत भारत या विदेशों में अपराध से अर्जित संपत्तियों की कुर्की शीघ्र करने के लिए एक विशेष मंच बनाया जाएगा। यह मंच भगोड़े अपराधियों की भारत वापसी के लिए दबाव बनाएगा, जिससे अपराध के मामलों में भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र में उनके खिलाफ मुकदमा चलाना आसान होगा। अध्यादेश में किसी व्यक्ति को आर्थिक अपराध का भगोड़ा घोषित करने के लिए धनशोधन कानून 2002 के तहत विशेष अदालत का प्रावधान किया गया है।
अध्यादेश में अपराधों की एक सूची भी दी गई
बताया जा रहा है कि अध्यादेश से भगोड़े आर्थिक अपराधियों के मामले में कानून का अनुपालन दोबारा बनाए रखने की उम्मीद की जा रही है, क्योंकि आरोपियों को भारत लौटकर मामले में मुदकमे का सामना करने के लिए बाध्य किया जाएगा। इस अध्यादेश में आर्थिक अपराध के तहत अपराधों की एक सूची दी गई है। साथ ही, ऐसे मामलों से अदालत पर बोझ नहीं बढ़े, इसलिए अध्यादेश के दायरे में सिर्फ उन्हीं मामलों को शामिल किया गया है, जिनका कुल मूल्य 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक हो।
क्या होता है आर्थिक अपराध
आर्थिक अपराध का भगोड़ा उस व्यक्ति को कहा जाता है, जिसके खिलाफ अनुसूचित अपराध में गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया है और वह आपराधिक अभियोग से बचने के लिए देश से पलायन कर चुका है या विदेश में निवास कर रहा है और आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए भारत आने से इनकार करता है।
कई कारोबारी बैंकों को चूना लगाकर छोड़ चुके हैं देश
बता दें कि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के अधिकारियों की मिलीभगत से हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चोकसी बैंक को 30,000 करोड़ से अधिक का चूना लगाकर देश से पलायन कर चुके हैं। यहीं नहीं, विमानन कंपनी किंगफिशर एयरलाइन्स के मालिक विजय माल्या बैंकों से भारी कर्ज लेकर कुछ साल पहले देश से पलायन कर लंदन चले गए हैं। इसके अलावा तमाम ऐसे कारोबारी हैं जो बैंकों को चूना लगाकर देश छोड़ चुके हैं।

