Sunday, 22 April 2018

बैंकों को चूना लगाने वालों की सम्पत्ति होगी जब्त, मोदी सरकार ने दी अध्यादेश को मंजूरी

New Delhi.  देश में बैंक घोटालों और बैंकों को चूना लगाकर विदेश भागने वालों की संपत्तियां जब्त कर ली जाएंगी। इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार एक अध्यादेश ला रही है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस अध्यादेश को मंजूरी मिल गई है।



आर्थिक अपराध पर लगाम के लिए बनेगा विशेष मंच


केंद्र की मोदी सरकार ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अध्यादेश-2018 लाने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि अध्यादेश का मकसद आर्थिक अपराधियों पर भारतीय न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहकर भारतीय कानून की प्रक्रिया से बचने के मामले में लगाम कसना है। अध्यादेश के तहत भारत या विदेशों में अपराध से अर्जित संपत्तियों की कुर्की शीघ्र करने के लिए एक विशेष मंच बनाया जाएगा। यह मंच भगोड़े अपराधियों की भारत वापसी के लिए दबाव बनाएगा, जिससे अपराध के मामलों में भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र में उनके खिलाफ मुकदमा चलाना आसान होगा। अध्यादेश में किसी व्यक्ति को आर्थिक अपराध का भगोड़ा घोषित करने के लिए धनशोधन कानून 2002 के तहत विशेष अदालत का प्रावधान किया गया है।

अध्यादेश में अपराधों की एक सूची भी दी गई


बताया जा रहा है कि अध्यादेश से भगोड़े आर्थिक अपराधियों के मामले में कानून का अनुपालन दोबारा बनाए रखने की उम्मीद की जा रही है, क्योंकि आरोपियों को भारत लौटकर मामले में मुदकमे का सामना करने के लिए बाध्य किया जाएगा। इस अध्यादेश में आर्थिक अपराध के तहत अपराधों की एक सूची दी गई है। साथ ही, ऐसे मामलों से अदालत पर बोझ नहीं बढ़े, इसलिए अध्यादेश के दायरे में सिर्फ उन्हीं मामलों को शामिल किया गया है, जिनका कुल मूल्य 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक हो।

क्या होता है आर्थिक अपराध


आर्थिक अपराध का भगोड़ा उस व्यक्ति को कहा जाता है, जिसके खिलाफ अनुसूचित अपराध में गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया है और वह आपराधिक अभियोग से बचने के लिए देश से पलायन कर चुका है या विदेश में निवास कर रहा है और आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए भारत आने से इनकार करता है।

कई कारोबारी बैंकों को चूना लगाकर छोड़ चुके हैं देश


बता दें कि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के अधिकारियों की मिलीभगत से हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चोकसी बैंक को 30,000 करोड़ से अधिक का चूना लगाकर देश से पलायन कर चुके हैं। यहीं नहीं, विमानन कंपनी किंगफिशर एयरलाइन्स के मालिक विजय माल्या बैंकों से भारी कर्ज लेकर कुछ साल पहले देश से पलायन कर लंदन चले गए हैं। इसके अलावा तमाम ऐसे कारोबारी हैं जो बैंकों को चूना लगाकर देश छोड़ चुके हैं।

Tuesday, 17 April 2018

तो क्या फिर बंद हो गया कपिल शर्मा का शो - Kapil Sharma

MUMBAI.  कॉमेडी किंग कपिल शर्मा पर फिर मंडराए दुख के बादल, एक लंबे ब्रेक के बाद कपिल शर्मा ने 25 मार्च को अपने नए शो 'फैमिली टाइम विद कपिल शर्मा' के साथ वापसी की थी। लेकिन उनके सितारे गर्दिश में ही चल रहे हैं। दो एपिसोड के बाद ही चैनल ने शो को ब्रेक दे दिया। 

हालांकि, कॉमेडियन कपिल शर्मा कब तक ऑफ एयर रहेंगे इस बारे में फिलहाल कोई खबर नहीं है। शो की कास्ट और क्रू मेंबर्स को भी बता दिया गया है, कि शो की शूटिंग दोबारा शुरू होने के फिल्हाल चान्स नजर नहीं आ रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक प्रोड्यूसर हेमंत रूपारेल और रंजीत ठाकुर शो अलग होने की तैयारी में हैं। लेकिन शो के सेट से अभी अलग नहीं हुए हैं। सोनी चैनल कुछ दिन अभी इंतजार करने के मूड में है ।

बताना चाहेंगे कि पिछले साल सुनील ग्रोवर से हुए विवाद के बाद भी कपिल ने अपने शो द कपिल शर्मा शो  के लिए कई बार शूटिंग टाल दी थी, जिसकी वजह से कई बड़े स्टार्स कपिल से नाराज हो गए थे। इसलिए कॉमेडियन को ब्रेक देने के लिहाज से शो पिछले साल सितम्बर में बंद कर दिया गया। चैनल ने कपिल को सख्त चेतावनी दी और एक बार फिर आए लेकन चीजें एक बार फिर बिगड़ती नजर आ रही हैं।
 
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Wednesday, 11 April 2018

सुप्रीम कोर्ट का फैसला, चीफ जस्टिस के पास ही है केसों को बांटने का अधिकार- Newstimes

New Delhi. उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि देश के चीफ जस्टिस अपने समकक्षों में प्रथम हैं और केसों के आवंटन और उनकी हेयरिंग के लिए पीठ के गठन का संवैधानिक अधिकार उनके पास ही है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला, चीफ जस्टिस के पास ही है केसों को बांटने का अधिकार
Supreme Court

देश के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने मुकदमों के तर्कपूर्ण व पारदर्शी आवंटन और उनकी हेयरिंग के लिए पीठों के गठन में दिशा-निर्देश तय करने की मांग करने वाली जनहित याचिका को खारिज कर यह टिप्पणी की।

नहीं है कोई अविश्वास


जजों की पीठ के लिए निर्णय लिखते हुए न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ ने संवैधानिक उपचार का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि देश के चीफ जस्टिस अपने समकक्षों में सबसे पहले हैं और केसों के आवंटन तथा पीठों के बनाने का अधिकार उनके पास है। आदेश में कहा गया है कि चूंकि भारत के प्रधान न्यायाधीश उच्च संवैधानिक पदाधिकारी हैं, ऐसे में उच्चतम न्यायालय द्वारा संविधान के तहत आने वाले कार्यों को सुनिश्चित करने के लिए उनके द्वारा निभाई जाने वाली जिम्मेदारियों को लेकर कोई अविश्वास नहीं हो सकता है।