New Delhi. उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि देश के चीफ जस्टिस अपने समकक्षों में प्रथम हैं और केसों के आवंटन और उनकी हेयरिंग के लिए पीठ के गठन का संवैधानिक अधिकार उनके पास ही है।
देश के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने मुकदमों के तर्कपूर्ण व पारदर्शी आवंटन और उनकी हेयरिंग के लिए पीठों के गठन में दिशा-निर्देश तय करने की मांग करने वाली जनहित याचिका को खारिज कर यह टिप्पणी की।
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| Supreme Court |
देश के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने मुकदमों के तर्कपूर्ण व पारदर्शी आवंटन और उनकी हेयरिंग के लिए पीठों के गठन में दिशा-निर्देश तय करने की मांग करने वाली जनहित याचिका को खारिज कर यह टिप्पणी की।
नहीं है कोई अविश्वास
जजों की पीठ के लिए निर्णय लिखते हुए न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ ने संवैधानिक उपचार का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि देश के चीफ जस्टिस अपने समकक्षों में सबसे पहले हैं और केसों के आवंटन तथा पीठों के बनाने का अधिकार उनके पास है। आदेश में कहा गया है कि चूंकि भारत के प्रधान न्यायाधीश उच्च संवैधानिक पदाधिकारी हैं, ऐसे में उच्चतम न्यायालय द्वारा संविधान के तहत आने वाले कार्यों को सुनिश्चित करने के लिए उनके द्वारा निभाई जाने वाली जिम्मेदारियों को लेकर कोई अविश्वास नहीं हो सकता है।

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